नमस्कार स्वागत है आपका हमारे इस ब्लॉग पर।
इंटरनेट ऑफ थिंग्स यानी वे डिवाइसेज़ जिनमें सेंसर होता है और जो इंटरनेट के माध्यम से एक ऑब्जेक्ट से दूसरे ऑब्जेक्ट को डेटा ट्रांसमिट कर सकते हैं. दरअसल ब्रिकर बोट नाम का ऐसा ही मैलवेयर साल 2017 में फैला था। इस मैलवेयर ने एमटीएनएल और बीएसएनएस के ब्रॉडबैंड सर्विस को नुकसान पहुंचाया था।
सिलेक्स मैलवेयर इंटरनेट ऑफ थिंग्स डिवाइसेज़ के स्टोरेज को पूरी तरह से खराब करने के साथ साथ डिवाइस के नेटवर्क कॉन्फिगरेशन को हटाने के अलावा फायरवॉल रूल्स को भी बेकार करके डिवाइस को पूरी तरह से ‘ब्रिक’ यानी खराब कर देता है।
इस तरह काम करता है यह मैलवेयर
टेक्नॉलजी की दुनिया में नए नए अविष्कार तो होते ही रहते हैं लेकिन नए नए खतरे भी आते हैं और ऐसा ही एक नया खतरा अब मंडरा रहा है. दरअसल सिलेक्स नाम का एक नया मैलवेयर यानी वायरस दुनिया के इंटरनेट ऑफ थिंग्स डिवाइसेज़ को नुकसान पहुंचा रहा है।

इसके चलते बीएसएनएल ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स के कम से कम 60,000 मॉडेम प्रभावित हुए थे. दरअसल यह मैलवेयर भी काफी कुछ उसी तरीके से डिवाइसेज़ को नुकसान पहुंचा रहा है लेकिन ये उससे कहीं ज्यादा खतरनाक है।
इस मैलवेयर को 14 साल के एक लड़के ने बनाया है जिसका कोडनेम लाइट लीफ़ों है. दरअसल ज़डनेट की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मैलवेयर के अटैक के बाद स्मार्ट इंटरनेट ऑफ थिंग्स डिवाइसेज़ किसी काम के नहीं रहते ह।
इस मैलवेयर को 14 साल के एक लड़के ने बनाया है जिसका कोडनेम लाइट लीफ़ों है. दरअसल ज़डनेट की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मैलवेयर के अटैक के बाद स्मार्ट इंटरनेट ऑफ थिंग्स डिवाइसेज़ किसी काम के नहीं रहते ह।
सिलेक्स मैलवेयर इंटरनेट ऑफ थिंग्स डिवाइसेज़ के स्टोरेज को पूरी तरह से खराब करने के साथ साथ डिवाइस के नेटवर्क कॉन्फिगरेशन को हटाने के अलावा फायरवॉल रूल्स को भी बेकार करके डिवाइस को पूरी तरह से ‘ब्रिक’ यानी खराब कर देता है।
इस तरह काम करता है यह मैलवेयर
इस मैलवेयर के हमले के बाद यूज़र को लगता है कि हार्डवेयर में कोई खराबी आ गई है जबकि ऐसा नहीं होता है। दरअसल इस अटैक से निपटने के लिए यूज़र के फर्मवेयर को मैनुअली फिर से इन्स्टॉल करना पड़ेगा जो कि ज्यादातर यूज़र्स के लिए काफी मुश्किल काम है। इसका सबसे पहले पता अकामाई रिसर्चर लैरी कैशडॉलर ने लगाया।
कौन है साइलेक्स मैलवेयर के पीछे
मालूम हो कि ज़डनेट ने न्यू स्काई सिक्योरिटी के रिसर्चर अंकित अनुभव के ज़रिए मैलवेयर को बनाने वाले तक पहुंचकर उसका आगे का प्लान जानने की कोशिश की. दरअसल अंकित अनुभव के मुताबिक इस मैलवेयर के पीछे नकली नाम लाइट लीफ़ों वाले 14 साल के एक किशोर का हाथ है।
दरअसल ज़डनेट की रिपोर्ट के मुताबिक, लाइट लीफ़ों ने बताया कि यह काम मज़ाक में शुरू किया गया था लेकिन अब यह फुल टाइम प्रोजेक्ट बन चुका है. वह इसे और भी खतरनाक तरीके से डिवेलप करने वाला है. यह साल 2017 के ब्रिक बॉट के अटैक ने 1 करोड़ से ज्यादा डिवाइसेज़ को प्रभावित किया था।

कौन है साइलेक्स मैलवेयर के पीछे
मालूम हो कि ज़डनेट ने न्यू स्काई सिक्योरिटी के रिसर्चर अंकित अनुभव के ज़रिए मैलवेयर को बनाने वाले तक पहुंचकर उसका आगे का प्लान जानने की कोशिश की. दरअसल अंकित अनुभव के मुताबिक इस मैलवेयर के पीछे नकली नाम लाइट लीफ़ों वाले 14 साल के एक किशोर का हाथ है।
दरअसल ज़डनेट की रिपोर्ट के मुताबिक, लाइट लीफ़ों ने बताया कि यह काम मज़ाक में शुरू किया गया था लेकिन अब यह फुल टाइम प्रोजेक्ट बन चुका है. वह इसे और भी खतरनाक तरीके से डिवेलप करने वाला है. यह साल 2017 के ब्रिक बॉट के अटैक ने 1 करोड़ से ज्यादा डिवाइसेज़ को प्रभावित किया था।
0 comments: