पहले अपने आपको बदले बाकी सब अपने आप बदल जाएंगे।

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पहले खुद को बदले , लोग खुद बदले हुए नजर आएंगे।

हम बात करेंगे एक ऐसे विषय पर जिससे आप हररोज महसूस करते है, कभी घर मे तो कभी office मे। हमेश हम यही चाहते है कि लोग मेरे मुताबिक चले ,मैं जैसे कहु वैसे ही बर्ताव करे लेकिन क्या सच मे ऐसा मुमकिन है ? चलो आपके बारे में बात करते है ,अगर आपसे कोई कहे कि," आज से तुम मेरे मुताबिक निर्णय लो तुम्हे मै जैसे कहु वैसा ही रहना होगा" क्या आप ऐसा करोगे ? आप कहोगे मैं ऐसा बिल्कुल नही करूँगा उनका निर्णय वो मेरे ऊपर ऐसे थोप नही सकते। 



अगर आप किसीके कहने से नही बदलना चाहते तो जाहिर सी बात है कोई और भी आपके कहने के मुताबिक नही बदल सकता क्योंकि उनका भी तो स्वतंत्र अस्तित्व है ,उनके अपने विचार है ,वो भी तो अपनी मर्जी से जीना चाहते है।



बात तो छोटी है पर इसका असर बहुत बड़ा होता है। ज्यादातर रिश्ते इसी बात को लेकर बिघड जाते है ; एक उदाहरण , " माता -पिता को लगता है कि बेटी या बेटे को मेरे मुताबिक रहना चाहिए मै जो कहु वैसे ही करना चाहिए मानते है को उनको अनुभव ज्यादा होता है लेकिन जब बच्चे बड़े होते है तो उनका निर्णय उन्हें लेने दे ताकि वो भी तो खुद के निर्णय स्वयं लेना सिख सके। अभी कुछ समय पहले बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट आये है तो माता पिता बच्चों को दबाब डालते है , तुम्हे डॉक्टर बनना है इंजीनियर बनना है तो बच्चे अभी तो माता पिता की बात मान लेते है लेकिन क्या वो भी यही चाहते है या फिर दबाव में आकर उन्होंने हाँ कहा है"? मानते है कि बड़ो को अनुभव भी ज्यादा होता है लेकिन दूसरोंके मन का विचार भी आवश्यक होता है ,इस बात पर विचार आवश्य कीजियेगा।  


अपने निर्णय ओपिनियन किसी और पे थोपे नही क्योंकि हर किसीको अपने निर्णय स्वयं लेने का अधिकार होता है। और इससे एकदूसरे प्रति आदरभाव बढ़ता है।
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